Sun 06 July, 2008
अस्तित्व में प्रकृति चार अवस्थाओं के रूप में अपनी वास्तविकताओं को प्रकट की है। इस प्रकटन में कुछ भाग मनुष्य को इन्द्रिय-गोचर है, तथा कुछ भाग ज्ञान-गोचर है। रूप तथा सम-विषम गुण इन्द्रिय-गोचर है - मतलब यह मनुष्य को अपनी इन्द्रियों से समझ आता है। मध्यस्थ-गुण, स्व-भाव और धर्म ज्ञान-गोचर …
...वे उन्हें अपनी महबूबा भी मान सकते हैं” साथी अविनाश से कहना है कि इस बातचीत को ज्यों का त्यों एकालाप और जवाब के रूप में एक पोस्ट के रूप में पेश करें। बस एक जगह से आत्मीय संबोधन “चचा” उड़ा दें, ग़लत जगह लग गया है। यह आग्रह इसलिए …
शरीर को जीवन मानने पर जीवन की ४.५ क्रियाएं प्रकट हो ज़ाती हैं। मनुष्य में ४.५ क्रियाएं क्रियाशील हैं - इसके प्रमाण में सुख की चाहत प्रकट हो गयी। यह चाहत बाकी ५.५ क्रियाओं के चालित हुए बिना पूरा होता नहीं है। प्रश्न: "मैं सुख चाहता हूँ।" - क्या इस …
सभ्यता के उत्तरार्ध में शब्दश: कुछ भी नहीं होगा जो भी होगा वह अपने लेबलों से कम होगा लेबलों के बाहर कुछ भे नहीं होगा न कोई वस्तु न व्यक्ति सारी शक्ति लेबलों में होगी शब्दश: कुछ भी नहीं होगा शब्दों पर भरोसा नहीं करेगा कोई फिर भी शब्दों पर कब्जा …
मैं कदम पर कदम बढ़ाता रहा और, पीछे छूटते मील के पत्थरों की कतारों ने नहीं होने दिया ये महसूस कि- घर से बहुत दूर निकल आया हूं, यहां नई दुनिया के नए लोग हैं जो, शहर के बीचोबीच सवाल करते हैं कि- 'तुम यहां तक पहुंचे कैसे?' क्या …
बाईसन : शायद पशुपालन के
पहले जंगली गाय और बैल कुछ
ऐसे होते होंगे?
एक पानी में भीगी हुई किताब जाने किसने? सूखने के लिए रख दी है धूप में जैसे जैसे नमी भाप बनती है पन्ने फड़फड़ाकर खुलने लगते हैं नीली स्याही से लिखे हर्फ़ भीगने से धुँधले पड़ गये हैं और... चश्मा लगाकर भी इन आँखों से पढ़ नहीं मिलते हैं जाने …
रायपुर, 6 जुलाई 2008 वरिष्ठ साहित्यकार व पत्रकार श्यामलाल चतुर्वेदी को छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है. इस आशय का आदेश कल राज्य के संस्कृति विभाग ने जारी किया है. 82 वर्षीय श्री चतुर्वेदी विगत 6 दशकों से छत्तीसगढ़ी साहित्य के प्रति समर्पित रहे हैं और उनकी अनेक …
सच और झूंट के बीच होता है ,
एक पतला सा विशवास का धागा !
गर विश्वास डगमगाया ,
और विश्वास हटा ,
तो प्रेम में चटख आ जायगी ,
कहे मदन गोपाल फिर जुड़ेगी
नहीं वह
दरार न झूंट से न सच से !
दोस्तो आज इतवार के दिन एक बड़ा ही प्यारा गीत सुनिए जो मुझे बचपन से बहुत पसंद रहा है. मुझे यकीन है आप को भी ये गीत पसंद आएगा. रौशन का संगीत, लता मंगेशकर की आवाज़ - आनंद लीजिये : फ़िल्म : अजी बस शुक्रिया (१९५८) संगीत : रौशन गीत …
रायपुर, 6 जुलाई 2008 सतनामी समाज के धर्मगुरू बालदास की रिहाई की मांग को लेकर कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, सर्वसमाज महासभा आदि के आव्हान पर कल 5 जुलाई को छत्तीसगढ़ बंद का आयोजन किया गया. बंद का मिला जुला असर देखने को मिला. रायपुर में बंद को भारी सफलता मिली …
उत्तर - प्रदेश में जब बहनजी (मायावती) ने सत्ता ग्रहण की थी तो लगा था कि अब मुलायम के जंगलराज से मुक्ति मिल गई है। पर जैसे - जैसे समय गुजर रहा है और बहनजी के सांसद, विधायक, मंत्री आदि आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए जा रहे हैं ( उदहारण …
आइना है तेरी आवाज़
जहाँ दिखती है मुझे
अपनी मुकम्मिल शक्ल
हो उठता हूँ जीवित
सुनकर तेरी आवाज़
अंधेरों में भी
सूझ पड़ता है रास्ता
हो जाता हूँ शामिल
दुनिया में
नई ताजगी
और नए विश्वास के साथ ,
जब सुनता हूँ -
तेरी आवाज़
आवाज़ दो मुझे पुकारो मेरा नाम बार बार इसी से होता है अहसास होने का होता है गुमान कि नहीं हुआ हूँ गुम अनजानी गलियों में तेरी आवाज़ से हो पाता है यकीन कि नहीं हुआ हूँ ओझल अपनी ही नज़रों से चाहता हूँ बने रहना अपनी नज़रों में आवाज़ …
लिपट जाओ ऐसे जैसे लिपट जाती है लताएँ पेड़ों से छा जाओ मुझपर जैसे छा जाता है मेघ आसमान पर बना लो मुझे अपना शरबत में मिठास की तरह निचोड़ लो मेरा हर कतरा नींबू की तरह निगल जाओ मेरा वजूद जैसे निगल लेती है मृत्यु उकता गया हूँ अपने …
‘आमिश’ जब ये शब्द पहली बार सुना था तो लगा था की उर्दु/फ़ारसी का शब्द है - रंजिश, आराइश, पैदाइश से काफ़िया मिलाता. पर निकला कुछ और! एक दशक पूर्व मैं भारत से जब अमरीका आया था तब मेरे लिये अमरीका के मायने थे एक आर्थिक और तकनीकी रूप …
शेर गौर फरमाए.............. की
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बहार आने से पहले खिजा आ गई,
बहार आने से पहले खिजा आ गई,
दो फूल खिलने से पहले बकरी
खा गई । ।
मैं तब अल्मोड़ा में था जब गुलामी अली का ये एलबम निकला था, लाला बाजार में घूमते हुए अक्सर इसकी एक गजल जो सुनायी पड़ती थी, वो थी - एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी। तब गुलाम अली की गजलें मुझे इतनी पसंद नही थी लेकिन …
(पिछले अंक से जारी…) (26) आज देखा है आज देखा है मनुज को ज़िन्दगी से जूझते, संघर्ष करते ! वंचना की टूटती चट्टान की आवाज़ कानों ने सुनी है, और पैरों को हुआ महसूस धरती हिल रही है ! आज मन भी दे रहा निश्चय गवाही दु:ख-पूर्णा-रात …
आज जो कुछ अमर सिंह की प्रेस कान्फ्रेस में हुआ वह न तो पत्रकारिता के लिहाज से बेहतर है और न ही लोकतंत्र के । प्रश्न यह नहीं कि एक रिपोर्टर को प्रेस कान्फ्रेंस से बाहर कर दिया बल्कि असल मुद्दा तो यह है कि आखिर पत्रकारिता के पेशे …
ममता या आक्रामकता: हारमोन का खेल है सब 'ए बी सी चैनल' के एक विशेष कार्यक्रम, "Boys and Girls are Different", में टीवी होस्ट जॉन स्टोशेल ने कई विश्वविद्यालयों द्वारा नारी और पुरूष के बीच जन्मजात अंतरों को पहचानने के किए गए कई अध्ययनों के बारे में जानकारी दी. …
ममता या आक्रामकता: हारमोन का खेल है सब 'ए बी सी चैनल' के एक विशेष कार्यक्रम, "Boys and Girls are Different", में टीवी होस्ट जॉन स्टोशेल ने कई विश्वविद्यालयों द्वारा नारी और पुरूष के बीच जन्मजात अंतरों को पहचानने के किए गए कई अध्ययनों के बारे में जानकारी दी. इन …
_मुझे इस जटिल विषय से आपका पहला परिचय कराने के लिए इससे अच्छा लेख नहीं मिल सकता था, आप इस लिंक पर जाकर फ्रेंक यार्क के मूल आलेख को अंग्रेज़ी में पढ़ सकते हैं._ ममता या आक्रामकता: हारमोन का खेल है सब 'ए बी सी चैनल' के एक विशेष कार्यक्रम, …
------------------------- पिछले ३० दिनों में सर्वाधिक पढ़ी जाने वाली मेरी ब्लॉग पोस्टें, जैसा फीडबर्नर ने सम्पादित किया है; निम्न हैं: १. अहिन्दी भाषी श्री जी. विश्वनाथ का परिचय… २. अशोक पाण्डेय, उत्कृष्टता, खेतीबाड़ी और द… ३. iGoogle से ब्लॉगस्पॉट में पोस्टिंग का ग… ४. मिलिये स्वघोषित भावी प्रधानमन्त्री से! …
इस क्षण में जीना जैसे- जैसे हम ध्यान में गहरे उतरते हैं, समय विलीन हो जाता है। जब ध्यान अपनी परिपूर्णता में खिलता है, समय खोजने पर भी नहीं मिलता। यह युगपत होता है- जब मन खो जाता है, समय भी खो जाता है। इसलिए सदियों से रहस्यवादी संत …
नेत्र के अलावा आंख का एक और पर्यायवाची शब्द है नयन। हिन्दी की अन्य बोलियों में इसके लिए नैन और नैना जैसे शब्द भी प्रचलित हैं। नयन का जन्म संस्कृत धातु नी से हुआ है जिसका अर्थ ले जाना, मार्गदर्शन करना, संचालन करना आदि है। नी से बना नयः और …
वैधानिक चेतावनी-यह व्यंग्य नहीं है मीडिया की दुनिया में अब भी इंटरनेट को बतौर माध्यम बहुत गंभीरता से नहीं लिया जाता। पत्रकारिता के अधिकांश कोर्सों में आनलाइन पत्रकारिता एकाध टापिक से ज्यादा नहीं है। मीडिया पढाने वालों और पढने वालों को इंटरनेट की खासियतों को समझना होगा। वरना उन्हे मीडिया …
अबला-सबला,
हँसना-रोना,
सोना-जागना,
उसको होता हर्ष,
सन्तान का उत्कर्ष।
सरल,विनीत और विनम्र,
सन्तान का सब कुछ क्षम्य,
हृदय है अगम्य,
हो जाये भ्रष्ट,
सन्तान हो ना नष्ट।
व्यष्टि-समष्टि,
सारी ये सृष्टि,
भले ही जायें,
सिद्धियां अष्ट,
सन्तान न पाये कष्ट.संतोष
गौड़ राष्ट्रप्रेमी
(पिछले अंक से जारी…) (20) दूर खेतों पार शीत की काली भयावह रात ! दूर खेतों पार जर्जर ढूह जीवन स्तब्ध, धुंध भीषण, काँपती प्रति रूह; जन-मन दग्ध, मूक प्राणों के दमन की बात ! मर्म पर अंतिम विनाशक चोट घायल त्रस्त, ले तिरस्कृत प्राण, रज में …
Ausländer विदेशी Aussprache उच्चारण Badezimmer स्नानगृह Basilikum तुलसी Beruf धंधा Bettler भिखारी Blume फूल Bockshornklee मेथी Briefmarke डाक टिकट Bruder भाई Cardamom इलायची Dummkopf मूर्ख Ehescheidung तलाक Farbe रंग Fehler भूल Fenchel सौंफ Fingernagel नाखून Flasche बोतल Fliege मक्खी Flöte बाँसुरी Frühling बसंत Gardine पर्दा Gast मेहमान Gelegenheit मौका Gewürznelke …
1 अतहर इमाम BHO 6520 AMWATSKA
2 जावेद खान BHO 1524 भोपाल
3 रोहित प्रसाद BHO 1529
भोपाल
4 श्वेता पांडे BHO 1613
भोपाल
5 तृप्ति शुक्ल BHO 4530 लखनऊ
MJ ( भोपाल कैम्पस ) 1 अभिषेक शर्मा भरतपुर BHO 3099 2 आदित्य कुमार BHO 2010 GORAKHPU 3 अमित कुमार ओंकार BHO 1198 खंडवा 4 अमित कुमार सोनी BHO 1041 भोपाल 5 आनंद प्रसाद जाट BHO 1200 भोपाल 6 आनंद सिंह BHO 4608 लखनऊ 7 अरुण कुमार BHO 4060 इलाहाबाद …
एक बार फिर मध्य प्रदेश जिसे हम भारत का दिल कहते हैं, ने दिल मोह लिया...एक बार पहले भी हमने मध्य प्रदेश पर एक कविता लिखी थी...आज फिर कुछ लिखने को जी चाह रहा है.. सुबह सुबह गल्फ न्यूज़ के पन्ने खोलते ही एक प्यारी सी मुस्कान में शारजाह की …
साइड हीरो के बारें में कितने लोग बात करना चाहतें है .....लेकिन आज आपको कुछ कहना नही है तो कमसे कम सुनना तो पड़ेगा ही ..ये काहनी मेरी है ...मेरे जैसे कई और की है ....तो शुरू करते है....जब घर से चले थे तो मेरी माँ को बस इतना पता …
एक हैं रामसहाय गुर्जर। इन दिनों महाशय का आतंक राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की पुलिस झेल रही है। बीहड़ में डकैत हैं रामसहाय गुर्जर। कल तक इनकी डकैत कमल गुर्जर से खूब छनती थी लेकिन अब पुलिस कमल गुर्जर के जरिए रामसहाय तक पहुंचने की फिराक में है। कमल गुर्जर …
6 मई को Marienplatz पर युरोप की बस, ट्रक, इंजन और मशीनें आदि बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में से एक 'MAN' (Maschinenfabrik Augsburg-Nürnberg AG) ने अपनी 250वीं सालगिरह मनाई। इस अवसर पर 'MAN auf Achse' के नाम से भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें कंपनी के 30 से भी अधिक …
10 मई म्युनिक। म्युनिक की चार बड़ी राहत संस्थाओं ने मिलकर म्युनिक की Bürgermeisterin Christine Strobl को शहर की 850वीं वर्षगाँठ पर होने वाले मेलों के दौरान उपहार के तौर पर मुफ़्त चिकित्सिक सेवायें प्रदान कीं। ये चार संस्थायें थीं Die Jahanniter, Münchner Rotes Kreuz, Arbeiter-Samariter-Bund और Malteser. इस अवसर …
इस दौड़ती-भागती जिंदगी में, उपर से महानगरीय जिंदगी में (‘करेला वो भी नीम चढ़ा’) अपने लिए वक्त निकाल पाना बहुत मुश्किल होता है। मुझे याद आती हैं चंद लाइनें जो हमेशा से ही मेरे दिल की गहराइयों में बसी हुई हैं। जब पहली बार अपने सहयोगी के कंप्यूटर के डेस्कटॉप …
9 मई, म्युनिक। म्युनिक शहर इस वर्ष अपनी 850वीं सालगिरह मना रहा है। इस अवसर पर म्युनिक की कुछ कंपनियों ने शहर के साथ मिलकर 850 नये प्रतिभाशाली और अनुभवी लोगों को नौकरी के लिये चुनने की मुहिम चलायी है जिसका नाम है '850 Talente für München' यानि 'म्युनिक के …
एक हैं रामसहाय गुर्जर। इन दिनों महाशय का आतंक राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की पुलिस झेल रही है। बीहड़ में डकैत हैं रामसहाय गुर्जर। कल तक इनकी डकैत कमल गुर्जर से खूब छनती थी लेकिन अब पुलिस कमल गुर्जर के जरिए रामसहाय तक पहुंचने की फिराक में है। कमल गुर्जर …
(पिछले अंक से जारी…) (16) नयी दिशा चारों ओर है गतिरोध ! पथ अवरुद्ध, खंडित मान्यताएँ हीन, जर्जर रूढ़ियों की सामने प्राचीन फैली 'चीन की दीवार' ! कैसे चढ़ सकोगे और कैसे कर सकोगे पार ? बोलो ! ये पुरातन नीतियाँ, विश्वास, मृत औ' संकुचित दर्शन पुराना …
जयराज अंकल हमारे पडौसी रहे जब से हम खार रहने आए। जयराज अंकल और सावित्री आंटी से मिला प्यार हमारे बचपन में रोज के भोजन के साथ मिली, मिठाई सा था ! जयराज जी का जन्म सितम्बर २८ , १९०९ निजाम स्टेट के करीमनगर जिल्ले में हुआ था। वे …
वैसे तो क्रिकेट मैच के बारे में कोई गणना करना आसान नहीं होता क्योंकि क्रिकेट दो खिलािड़यों का खेल नहीं होता और शायद इसलिये भी पिछले समय कई न्यूज चैनलों पर क्रिकेट के बारे में की गई भविष्यवाणियां गलत साबित हुईं। लेकिन मेरा मानना है कि इन गणनाओं में …
अब नहीं आतीं रात भर जाग के बात करने वाली रातें... अब नहीं होते खामोशी वाले कितने घंटे... अब नहीं मिलते मुश्किल से निकाले हुए पाँच मिनट... अब नहीं आता चार चार पन्नो का फ़ोन बिल... अब नहीं जगाती डर लगने पर किसी भी पहर तुम्हें... अब नहीं करती बारिशों …
अभी तक तो आपने अमर चित्रकथा पढ़ी होगी , हमने भी पढ़ी ओर खूब चटकारे ले कर पढ़ी । लेकिन अब बड़े हो गये है और शायद अमर चित्रकथा को भूल भी चुके थे, लेकिन एक किरदार ने हमे वो काँहनिया दुबारा याद करने पर मजबूर करा दिया है , …
कल तक एक दूसरे की जान के दुश्मन आज दोस्त हो गए हैं। होते भी क्यों नहीं, गरीबी और मज़बूरी कुछ भी करा देती है। लोग गरीबी से तंग आकर आत्महत्या तक कर लेते हैं और मज़बूरी में गधे को बाप तक कह देते हैं। उस हालात से तो अच्छा …
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आंधियां जब दे रही हों
दस्तकें
तब दिये की लौ बचाना सीखिए
ताक पर धर के उसूलों को कभी
नाम अपना मत कमाना सीखिए
---- नीरज जी के ब्लॉग पर एक
गज़ल से।
ज्ञानदत्त पाण्डेय
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वो बातें और हुआ करती थी वो ज़माने और हुआ करते थे ठोकरों में रखते थे दुनिया को वो हौसले और हुआ करते थे हम ख़ुद ही अपने खुदा होते थे वो ज़ज्बे और हुआ करते थे रौंद देते थे हालातों की नागफनियाँ वो काफिले और हुआ करते थे जिनमें …
पार्को मे या अंधेरे झुरमुटों के बीच बैठे प्रेमी जोडों पर अक्सर आप की नजरें पड़ी होंगी, लोग उन पर शंकित निगाहों से देखते हैं और आगे बढ़ जाते हैं, लेकिन मुंबई मे एक जगह लोग उन्हें देखने के लिए ही जाते हैं, और वो जगह है मुंबई का फाईव …
हाल-फिलहाल स्तंभ के अंतर्गत आप हिंदी में प्रकाशित नई साहित्यिक कृतियों से रू-ब-रू हैं। हम चुनी हुई इन कृतियों का एक संक्षिप्त परिचय और उनमें से कुछ अंश प्रकाशित कर रहे हैं और साथ ही उन कृतियों पर जाने-माने समीक्षक ओम निश्चल की संक्षिप्त टिप्पणी भी। हमें इस आयोजन …

