Sat 10 May, 2008
'जीवन का आदर्श क्या है?' एक युवक ने पूछा है। रात्रि घनी हो गयी है और आकाश तारों से भरा है। हवाओं में आज सर्दी है और शायद कोई कहता था कि कहीं ओले पड़े हैं। राह निर्जन है और वृक्षों के तले घना अंधेरा है। और इस शांत …
अमीरो से नफ़रत करते करते
कभी कभी लोग अमीरी से भी
नफ़रत करने लग जाते हे ओर
जिन्दगी भर गरीब बने रहने
का फ़ेसला कर डालते हे .
यहाँ तक तो आगये, अब खीज हो रही होगी । फ़ोकस बहुत बनाये पड़े हैं, और घिसे पिटे शीर्षक देकर लोगों को बेवक़ूफ़ बना रहे हैं । सीधी सी बात है, दुनिया... [[ This is a content summary only. Visit my website for full links, other content, and more! ]] …
भाई साहब बुरा ना मानना,
यकीन सा नहीं हो रहा है- जिस
मुल्क में दस मिनट संसद
कायदे से नहीं चलती, उस
मुल्क में एक राकेट दस
सैटलाइटों को लेकर चला गया
आसमान में। टीवी चैनलों
में इस पर ज्यादा कुछ नहीं
आया, क्योंकि इस राकेट [...]
दिल्ली से कल ही लौटे. टैक्सी घर के सामने रुकी तो छोटा बेटा विद्युत बाहर ही खड़ा था . सामान लेकर अन्दर पहुँचे तो घर साफ-सुथरा पाकर मन प्रसन्न हो गया. एकाध नुक्सान को नज़र अन्दाज़ करना ज़रूरी होता है सो हमने उस ओर ध्यान ही नहीं दिया. बेटे …
संघ में बहुत सक्रिय थे तो मां-बाप ने सोचा कि शादी करा दो, सब ठीक हो जाएगा और तब हमारी शादी हो गयी। राजस्थान के एक विधायक ने राजस्थान में बाल-विवाह के मसले पर एनडीटीवी को ये बाइट दी है। जाहिर है विधायकजी बाल-विवाह की सारी जिम्मवेवारी अपने मां-बाप और …
रात के ढाई बज रहे है। छत्तीसगढ की राजधानी रायपुर मे दमघोटू बदबू फैल रही है। शहर गहरी नीन्द से जाग उठा है। यह बदबू है डिस्टलरी की। रात का शैतान फिर से सक्रिय है। यह समझ नही आता कि यह देश आम लोगो का है या उन चन्द लोगो …
******पीपल की छाँव में कुछ पत्ते ****** पत्ते अक्सर टूट कर गिर जाते हैं या जला दिये जाते हैं जैसे दहेज लोभ में नारी॥ पत्ते अक्सर पूजे जाते हैं कभी बेल के, कभी पीपल के जैसे चुनाव में जनता॥ पत्ते अक्सर कुचले जाते हैं या छोड़े जाते है नियति पर …
शक्कर के देशी रूप को आमतौर पर खांड़ के रूप में जाना जाता है। बेहद प्रचलित यह शब्द संस्कृत के खण्डः से बना है जिसका एक अर्थ है टुकड़ा, पिण्ड, ईख-गन्ना अथवा कच्ची चीनी । खंड या खांड़ आज करीब करीब सभी भारतीय भाषाओं मे इसी या इससे मिलते जुलते …
देश के जाने माने गायक और संगीतविद पं फ़िरोज़ द्स्तूर का नौ मई को रात नौ बजे मुंबई में देहांत हो गया। 89 वर्ष के पं दस्तूर किराना घराने के रौशन चिराग़ थे। आज जब मेरे हारमोनियम वादक मित्र श्री सुधीर नाईक ने जब ये जानकारी मुम्बई से फ़ोन …
हंसी-खेल में कहीं नस सरक जाये या पैर की उंगलियों के बीच जाने कहां से सरककर एक कंकड़ चला आये, छूटा-दबा रह जाये और अचानक गड़े ऐसे कि मुंह से कसकती एक कराह छूटे चटककर कहीं कुछ भीतर टूटे वैसे ही रहते-रहते जीवन समझ लेने की हकबकायी बेचैनियां समझ …
न छपी है, न छपवाऊंगा पैसे दे कर मैं कभी किताब नहीं छपवाऊंगा न है शिल्प का ज्ञान न है छंद की पहचान फिर भी रोज नई नई रचना पेश करता जाउंगा पन्ना एक एक रोज भेज कर आपको झकझोड़ता जाऊंगा लेकिन पैसे दे कर मैं कभी किताब नहीं छपवाऊंगा …
मिमोह की संभावनाओं को
जिम्मी ने रोका
मिथुन चक्रवर्ती की की
दूसरी परी का
मिथुन चक्रवर्ती के सुपुत्र मिमोह ‘जिमी’ नामक फिल्म में प्रस्तुत हो रहे हैं। नेताओं, सितारों और डॉक्टरों के पुत्र प्राय: अपने पिता के व्यवसाय में जाते हैं। डॉक्टरों को पढ़ाई करनी होती है और पिता के व्यवसाय में होने से उन्हें परीक्षा में कोई खास रियायत नहीं मिलती। नेता और …
मिथुन चक्रवर्ती के सुपुत्र मिमोह ‘जिमी’ नामक फिल्म में प्रस्तुत हो रहे हैं। नेताओं, सितारों और डॉक्टरों के पुत्र प्राय: अपने पिता के व्यवसाय में जाते हैं। डॉक्टरों को पढ़ाई करनी होती है और पिता के व्यवसाय में होने से उन्हें परीक्षा में कोई खास रियायत नहीं मिलती। नेता और …
PRनिर्माता : नवमान मलिक-सलमान मलिक निर्देशक : राज एन. सिप्पी संगीत : आनंद राज आनंद कलाकार : मिमोह चक्रवर्ती, विवाना, राहुल देव, शक्ति कपूरये संयोग की बात है कि पिछले दो-तीन हफ्तों से उस तरह की फिल्में देखने को मिल रही हैं जैसी कि 1970-80 के दौर में देखने …
-ऋषभ देव शर्मा http://hindibharat.blogspot.com/2008/05/blog-post_08.html वे रसोई में अडी़ हैं, अडी़ रहें. वे बिस्तर में पड़ी हैं, पड़ी रहें. यानी वे संसद के बाहर खड़ी हैं, खड़ी रहें? ' गलतफहमी है आपको . सिर्फ़ आधी आबादी नहीं हैं वे. बाकी आधी दुनिया भी छिपी है उनके …
अश्रुपूरित ऑखों से हमेशा क्या सोचती रहती हो तुम लगता है जैसे कोई समुद्र मंथन हो रहा हो तुम्हारे भीतर सब कुछ कहकर भी जैसे कुछ न कह पाने की विवशता क्यो झलकती है बार-बार तुम्हारे भीतर तुम भरोसा करो मैं बिना बोले ही तुम्हारे जान जाता हूं बात …
उन चांद सितारों के बिखरे हुए शहरों में उन नूर की किरनों की ठहरी हुई लहरों में ठहरी हुई नहरों में, सोई हुई लहरों में ऐ ख़िज़र-ए-हसीं ले चल, ऐ इश्क कहीं ले चल आंखों में समाई है इक ख्वाब नुमा दुनिया तारों की तरह रौशन महताब नुमा दुनिया …
आधी आबादी -ऋषभ देव शर्मा वे रसोई में अडी़ हैं, अडी़ रहें. वे बिस्तर में पड़ी हैं, पड़ी रहें. यानी वे संसद के बाहर खड़ी हैं, खड़ी रहें? ' गलतफहमी है आपको . सिर्फ़ आधी आबादी नहीं हैं वे. बाकी आधी दुनिया भी छिपी है उनके गर्भ में, वे घुस …
यों ही रोककर निगाहों ने पूछा ऐ अजनबी तू क्यों, सगा-सा लगा? पत्थरों का देश है अनजान आसमान सवेरा भी गुमनाम है सूरज-चांद-सितारे सारे लगते बेजान हैं धमाको की गूंज बारूद की गंध जहां बसते हैं फूलों की खुशबू लिए मौत के खौफ में जिंदगी की मुस्कुराहट लिए …
काफी उत्साहजनक मूड था , कुछ नए विषय पर लिखने का . लेकिन एक हल्की सी खलल ने सब बंटाधार कर दिया . विषय था भूतों पर कुछ रहस्यमई बाते उजागर करने का . लेकिन शायद भूतों को यह बात गंवारा नहीं हुई कि कोई लम्पट छाप …
महंगाई किसी भी सरकार के लिए जी का जंजाल है । कीमतें गिरती हैं तो जनता-भी खुश और सरकार भी खुश । इसीलिए सरकार हर हफ्ते मुद्रा स्फीति के आंकडे प्रस्तुत करती रहती है । लेकिन लोंगो को पता नही क्यों इन आंकडों पर विश्वास नही होता । उनको लगता …
घी हर किसी को हजम नहीं होता। पर कई होते हैं, जो इंसान को भी कच्चा चबा जाएं। डकार भी न लें। अपन आज राजनीति के दो महारथियों की बात करेंगे। पी. चिदंबरम। जिनने ताजा बढ़ी महंगाई पर कहा- ‘इतनी भी नहीं बढ़ी। चीखने-चिल्लाने की जरूरत नहीं।' दूसरे- अर्जुन सिंह। …
कहाजाता है न कि हर लेखक की शुरुआत कविता से होती है। मेरा यह मानना है कि लिखने और पढ़ने की ओर आकर्षण बिना कविता के हो ही नहीं सकता। बचपन में हम सभी के कानों में अपनी मातृबोलियों और भाषाओं के गीत ही पड़े होंगे। कुछ के यहां बहुत …
हम और हमारा समय अपनी पीढ़ी के कवियों में राधेश्याम तिवारी लगभग अकेले ऎसे कवि हैं जिनकी कविताएं एक साथ गांव एवं शहर - दोनों से हमें जोड़ती हैं। गहरे जीवनानुभवों से उपजी उनकी कविताओं की सबसे बड़ी विशेषता जीवन के प्रति इनका सकारात्मक नजरिया है। यही कारण है कि …
Fri 09 May, 2008
फ़र्क सूरज प्रकाश कुंदन आज बहुत खुश है। आज का दिन उसे मनमाफिक तरीके से मनाने के लिए मिला है। खूब घुमायेगा बच्चों को। पार्क, सिनेमा, चिड़ियाघर। किसी अच्छे होटल में खाना खिलायेगा। आज उसे मारुति वैन चलाते हुए अजब-सा रोमांच हो रहा है। रोज यही वैन चलाता है वह, …
फिल्म कामेडी हो या सस्पेंस या फिर सामाजिक रूप में प्रासंगिक, दर्शक उन्हीं फिल्मों को पसंद करते हैं, जो अच्छी बनी हो। पिछले हफ्ते की रिलीज फिल्मों को देखें तो तीनों फिल्में अलग-अलग मिजाज की थीं। उम्मीद की जा रही थी कि कामेडी और सस्पेंस को ठीक-ठाक दर्शक मिल जाएंगे, …
विस्फोट नाम ब्लागवाणी पर दिखा तो दो तरह की प्रतिक्रियाएं मिली हैं. क्या मैथिली जी डर गये? या फिर संजय तिवारी झुक गये. मैथिली जी किससे डरेंगे और क्यों? हां संजय तिवारी झुक गया है. लेट गया है, दंडवत हो गया है. और केवल मैथिली जी के सामने नहीं …
मेरे वाराणसी के पैतृक निवास से मेरा गाज़ीपुर में स्थित ननिहाल कुछ अस्सी किलोमीटर दूर है। आजकल अगर जाना हो तो कार से २ घंटे या ट्रेन से सब मिला जुला कर तीन-चार घंटे लगते हैं। इस गाँव से सबसे नजदीकी शहर गाजीपुर है जो करीब २५ किलोमीटर दूर है। …
अभी कल ही क़ी बात है। देश का सबसे उम्रदराज 24 घंटे का हिन्दी न्यूज़ चैनल करवट बदल रहा था। सभी की निगाहें टिकी हुईं थी- एक नई शुरुआत पर। तय समय था रात के 9 बजकर 56 मिनट। ठीक समय पर चैनल के "लोगो" पर से परदा उठा और …
बात उन दिनों की है जब हर गाँव, बाग-बगीचों में भूत-प्रेतों का साम्राज्य था। गाँवों के अगल-बगल में पेड़-पौधों, झाड़-झंखाड़ों, बागों (महुआनी, आमवारी, बँसवारी आदि) की बहुलता हुआ करती थी । एक गाँव से दूसरे गाँव में जाने के लिए पगडंडियों से होकर जाना पड़ता था। कमजोर लोग खरखर दुपहरिया …
आज एक समाचार पत्र के सम्पादकीय पृष्ठ पर जाने माने पत्रकार और फिल्म निर्माता प्रीतीश नंदी का एक लेख प्रकाशित हुआ है। लेख में नंदी ने बीस साल पहले इलस्ट्रेड वीकली में अमिताभ बच्चन पर लिखे एक लेख फिनिश्ड का जिक्र किया है। नंदी ने इस लेख को लिखने …
पंडित छन्नूलाल मिश्र जी का गायन मैंने पहली बार अविनाश के मोहल्ले पर सुना था. 'मोरे पिछवरवा' सुनने के बाद मैं एकदम बौरा सा गया था. उसके बाद पंडिज्जी के संगीत को जमा करने का काम शुरू किया. अब मेरे पास उनका काफ़ी सारा संगीत है. अविनाश को धन्यवाद कहते …
कन्यादान करते समय हमारे कायस्थ समाज मे माता पिता अपनी पुत्री और दामाद के पैर छूते हैं । कन्यादान के समय बेटी के हाथ पर कोई न कोई जेवर रखना जरुरी होता हैं क्योकि दान कभी खाली हाथ नहीं किया जाता । जेवर हाथ मे रख कर उसका हाथ वर …
कब तक छलते रहोगे कब तक तुम मुझे छलते रहोगेबोलो कब तक तुम मुझे छलते रहोगेहर युग में तुम मुझे छलते रहे।सीता बन अग्नि परीक्षा दी मैंनेतुम्हे मर्यादा पुरषोत्तम बनाया किसने ?बोलो मर्यादा पुरषोत्तम बनाया किसने?गोपी बना विरह अग्नि में जलाया किसने?राधा बना बंसी की धुन पर नचाया मुझेबोलो …
.. इस पोस्ट का कोई उद्धरण उपलब्द्ध नहीं है ..
अंतर्र्जाल पर हिंदी लिखते हुए मुझे एक बात अनुभव हो रही है कि यहां रूढ़ता का भाव अपने हृदय में रखने को कोई मायने नहीं है। अंतर्जाल पर अनेक वेब साइटों और ब्लाग पर निकल रही हिंदी पत्र-पत्रिकाओं के नाम हिंदी में है तो अंग्रेजी में नहीं और अंग्रेजी में …
इस पोस्ट का औचित्य समझ
में नही आया, इसलिये उक्त
समग्री हटाई जा रही है।
ब्लाग प्रमुख
राजस्थान में एचआईवी पॉज़िटिव लोगों ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया है. उन्होंने 'इच्छा मृत्यु' की इजाज़त मांगी है. ये लोग अपनी माँगों को पूरा करवाने के लिए जयपुर में धरने पर बैठ गए हैं. इनका आरोप है की सरकार ज़रूरी दवाओं की व्यवस्था नहीं कर रही है. वहीं …
राजीवलोचन नाथ शुक्ल तुमने देखा ? वो, सामने बड़े से घर में, झबरा कुत्ता रहता है, बहुत मजे से घर में घूमा करता है अक्सर, मैंने देखा है उसे रोते और बिलखते बच्चों के बीच, चैन से दूध-रोटी खाते भी, या हड्डी चबाते कभी हड्डी जिसमें गोश्त लगा रहता है …
प्रार्थना प्रो सी॑ बी श्रीवास्तव विदग्ध C-6 , M.P.S.E.B. Colony Rampur , Jabalpur (M.P.) 482008 मोबा ०९४२५४८४४५२ हे दीनबन्धु दयालु प्रभु तुम विश्व के आधार हो तुम बिन्दु में हो सिन्धु , अणु में अपरिमित विस्तार हो । तुम चेतना , आलोक , ऊर्जा , गति अलख पावन परम् तम …
व्यंग ०० "भगवान कृष्ण का अपहरण" विवेक रंजन श्रीवास्तव सी - 6 , एम.पी.ई.बी.कालोनी रामपुर, जबलपुर ४८२००८ (भारत) मोबा. ०९४२५४८४४५२ ई मेल vivekranjan.vinamra@gmail.com हाईजैकिंग का जमाना है . जिसकी लाठी उसकी भैँस . मै चिल्लाता रह ही गया " मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई" ..और भगवान कृष्ण जो …
हम शब्दों के बुनकर हैं विवेक रंजन श्रीवास्तव सी॑ - 6 एम.पी.ई.बी.कालोनी रामपुर, जबलपुर ४८२००८ मोबा. ०९४२५४८४४५२ ई मेल vivekranjan.vinamra@gmail.com देवी हो तुम अक्षर की माँ , हम शब्दों के बुनकर हैं ! भाव प्रसून गूँथ भाषा में , गीत लाये हम चुनकर हैं !! भाव भंगिमा और तालियाँ, दर्शक …
अक्सर जब कोई इतिहास संबंधित किताब पढ़ता हूँ तो एक कौतुहल होता है कि उस समय जब वो घटना वास्तव में घटी होगी तो उस समय की आम जनता को कैसा लगता होगा। भारत की आजादी को ही ले लीजिये, अगस्त १९४७ में गाँव गाँव में लोग क्या सोचते होंगे? …
बिजली विवेक रंजन श्रीवास्तव c-6 , M.P.S.E.B. Colony Rampur , Jabalpur (M.P.) 482008 00९४२५४८४४५२ ई मेल vivekranjan.vinamra@gmailcom शक्ति स्वरूपा ,चपल चंचला ,दीप्ति स्वामिनी है बिजली , निराकार पर सर्व व्याप्त है , आभास दायिनी है बिजली ! मेघ प्रिया की गगन गर्जना , क्षितिज छोर से नभ तक है, वर्षा …
डॉ. अजित वडनेरकर ने कई किश्तों में मेरा आत्मकथ्य छापा । आम तौर पर जितने लोग मुझे पढ़ते हैं उससे कहीं ज्यादा लोगों ने टीपा भी । " मगर , आपका नाम क्या है ?" कई लोगों ने यही पूछा तो कुछ समय के लिए लगा कि मैं शोले …
बिजली प्रो सी बी श्रीवास्तव c-6 , M.P.S.E.B. Colony Rampur , Jabalpur (M.P.) 482008 00९४२५४८४४५२ ई मेल vivekranjan.vinamra@gmailcom अग्नि , वायु , जल गगन, पवन ये जीवन का आधाr है इनके किसी एक के बिन भी , सृष्टि सकल निष्प्राण है ! अग्नि , ताप , ऊर्जा प्रकाश का एक …
हमारे आपके सामने हो जाते हैं बाल विवाह और हम आप हैं कि कन्यादान में बाधा न डालने के धर्म भीरू संकल्प को लेकर खामोश रहतें हैं।हमारी यही भीरू प्रवृत्ति से सामाजिक स्वास्थ्य एवम सामाजिक सूचकों को नकारात्मकता दिशा देतें है । समाज को बदलने का दम भरती हमारी सोच …
आइये हम सब मिलकर प्रयास
करे अगर आप डी एल ऍफ़ कालोनी
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